Carrot Farming Business idea: इस तरह करिए गाजर की बुबाई, लगेगा सिर्फ 25 फीसदी बीज

Carrot Farming Business idea: अगर आप गाजर के बिजनेस का सोच रहे हैं तो आप सही जगह पर आए हैं, हम आपको यहां गाजर के बिजनेस से जुड़ी सारी जानकारी देंगे, गाजर की बिजनेस (Carrot Business) आप अगर शुरू करना चाहते हैं तो यह सही समय है इस बिजनेस को शुरू करने का। बहुत से लोग इस तथ्य को नहीं जानते होंगे कि आलू के बाद गाजर दुनिया भर में दूसरी पसंदीदा सब्जी (Favourite Veggie) है। गाजर की डिमांड भारत में भी काफी ज्यादा है और लोग गाजर पोस्टिक सब्जी अक्सर खाते हैं। गाजर की बिजनेस से आपकी वार्षिक इनकम (Profitable business) काफी ज्यादा बढ़ जाएगी। तो आइए जानते हैं इस बिजनेस के बारे में विस्तार से।

Carrot Farming Business idea

गाजर के बिजनेस में फसल बोने के 100 से 110 दिन में गाजर पूरी तरीके से तैयार हो जाएगी। भारतीय कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार अगर आपने पारंपरिक तरीके से बुवाई की है तो प्रति एकड़ 4.0 किलोग्राम तक बीज लगेगा। वहीं अगर आप बाजार में बिकने वाली मशीन का इस्तेमाल करते है तो इसमें आपको केबल 1 किलोग्राम बीज लगेगा। इस तरह आपकी बीज की बचत और उत्पाद भी अच्छी होती है।

कृषि विभाग के मुताबिक आप गाजर की बुवाई मेड़ों पर भी कर सकते हैं। गाजर की सब्जी उगाने से पहले 2 ग्राम कैप्टन को आप जरूर छिड़क दें। खेती शुरू करने से पहले आप एक किलोग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। खेती के समय आप देसी खाद पोटाश एवं फास्फोरस का प्रयोग जरूर करें। 

खेती के लिए उचित मिट्टी (suitable soil for cultivation)

अगर आप एक खेत शुरू करना चाहते हैं और सोच रहे हैं कि कौन सा फसल या सब्जी उगानी है तो शायद आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प होगा गाजर की सब्जी उगाना, बता दे खेती करने से पहले आप यह सुनिश्चित करले की मिट्टी में नमी हों। आपकी जानकारी के लिए बता दे गाजर की खेती दोमट भूमि में अच्छी होती है। खेती शुरू करने से पहले तीन चार बार देसी हल और बिक्ट्री हल से जोतना चाहिए, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो। बता दे 5-6 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टर आवश्यक होता है खेती के लिए। 

खेती के लिए सही जलवायु (Perfect Climate for Farming carrot)

गाजर के बीज 7.5 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सफलतापूर्वक विकसित होती है, गाजर की जड़ों की वृद्धि और उनका रंग तापमान से बहुत प्रभावित होता है। बता दे गाजर एक ठंडी जलवायु वाली फसल है। 15 से लेकर 20 डिग्री सेल्सियस पर गाजर के जोड़ों का आकार छोटा होता है, लेकिन ड्राइंग सबसे अच्छा होता है। आपको बता दें गाजर को विभिन्न प्रकार की भूमियों में उगाया जा सकता है, लेकिन अच्छी उपज के लिए उचित जल निकास वाली भुरभुरी दोमट भूमि लाभदायक होती है। 

पूसा रुधिर के लाभ 

पूसा रुधिर उपभोक्ता (Consumers) और किसानों (Farmers) दोनों के लिए फायदेमंद होता है, इसकी औसत उपज 30 टन प्रति हेक्टर बताई जाती है। जिसमें पत्तियां चोटी और जड़ लंबी होती है। बता पूसा रुधिर कैंसर के लिए भी एक पोस्टिक आहार बताया जाता है। परीक्षण में यह पाया गया है कि इनमें कैरोटीन 7.41 मिलीग्राम और फिनोल 45.15 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम है। इनका प्राथमिक गुण इनका एंटी ऑक्सीडेंट (Antioxidant) है। 

पूसा केसर 

गाजर की के किस्म लाल रंग की आती उत्तम होती है। यह बेहद आकर्षक होती है। बता दे यह फसल 90 से 110 दिन में तैयार हो जाती है, और इसकी पैदावार 300-350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो जाती है।  

खेती के लिए सिंचाई का समय और खाद 

गाजर (Carrot) की बुवाई के बाद सबसे पहले नाले में सिंचाई करनी चाहिए, ताकि मेड़ों में नमी बना रहे। उसके बाद आपको कुछ दिन बाद फिर सिचाई करनी चाहिए। गर्मियों के मौसम में आपको चार-पांच दिनों के अंतराल सिंचाई करनी चाहिए। 

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