Mustard oil Cultivation: इस साल हो सकता है सरसों का तेल सस्ता, किसानों की भी आय होगी दुगनी

Mustard oil Cultivation: इस साल हो सकता है सरसों का तेल सस्ता, किसानों की भी आय होगी दुगनी

Mustard Oil Cultivation: देशभर में पिछले साल सरसों के तेल का दाम काफी बढ़ गया था जिससे लोगों में काफी ज्यादा नाराजगी देखने को मिली थी, लेकिन सरसों के तेल को लेकर एक बड़ा खबर सामने आया है जिसके तहत बोला यह जा रहा है कि साल 2022 में सरसों के तेल का दाम कम हो सकता है, और किसानों की आय भी भी दुगनी हो सकती है।

आपको बता दें रबी सीजन (Rabi Season) के दौरान देशभर में करीब 110 लाख टन सरसों का उत्पादन होगा। इससे पहले 2021-2022 के फसल बर्ष में 85 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ था, जिससे सरसों के तेल में कमी देखने को मिली। अगर आप महंगाई के मार से परेशान हैं तो आपके लिए यह खबर एक अच्छी खबर साबित हो सकती है, क्योंकि इस साल सरसों के तेल के दाम में कमी आ सकती है।

Mustard Oil Cultivation

Mustard oil Cultivation

The “Cruciferae” family of plants includes mustard, which is frequently used in Indian cuisine. India is the world leader in mustard production. In India, mustard produces edible oil that is used in cooking. 

In India, mustard seed is used as a seasoning when making vegetable dishes and curries. Pickling uses oil and splits mustard seeds. Young plants’ methi leaves are consumed as a vegetable. It can be fed to cattle as an oil cake.

सरसों के स्वास्थ्य लाभ:

नीचे सूचीबद्ध सरसों के कुछ स्वास्थ्य लाभ हैं।

  • दमा के लक्षणों को कम करने में सहायक।
  • पेट के कैंसर के खतरे को कम करता है।
  • शरीर का वजन कम करता है।
  • गठिया और मांसपेशियों की परेशानी को कम करता है।
  • उम्र बढ़ने को धीमा करने में सहायता (एंटी-एजिंग)।
  • कोलेस्ट्रॉल कम करता है और बालों के विकास को प्रोत्साहित करता है।

Climatic Requirements For Mustard Farming

Mustard is grown in a subtropical region, which has certain climate needs. Since mustard thrives in a dry, chilly climate, it is typically grown during the Rabi season. 10°C to 25°C are the ideal temperatures for mustard crops. 

The mustard crop is grown in regions with annual rainfall ranging from 625 to 1000 mm. This crop needs a clear sky and no frost because it cannot survive frost.

Soil Requirements For Mustard Farming:

Mustard can be cultivated in a wide range of soil types, from light to heavy loamy soils, depending on the soil type. The optimum soils for growing mustard are medium to deep and well-drained. Mustard prefers a pH range of 6.0 to 7.5 in the soil.

Make sure to do a soil test to determine the soil’s characteristics, such as its kind, strength, and nutritional content.

सरसों की खेती में भूमि की तैयारी:

सरसों की खेती के लिए जमीन तैयार करने के लिए एक से दो जुताई और दो जोताई करनी पड़ती है। खरीफ की फसल के बाद, दो क्रॉसवाइज हैरोइंग प्राप्त करके खेत को दूसरी फसल के लिए तैयार किया जाना चाहिए।

सरसों की खेती में खाद और खाद:

सरसों की खेती में खाद एवं उर्वरक : खेत की तैयारी के भाग के रूप में प्रति हेक्टेयर 7 से 12 टन गोबर की खाद (F.Y.M) डालें। रोपण के समय 20 से 25 किलोग्राम पी2ओ5 और 30 से 35 किलोग्राम एन प्रति हेक्टेयर वर्षा सिंचित स्थिति में डालना चाहिए।

सिंचित फसल की बुवाई के समय बीज के नीचे 40 से 45 किग्रा N, 30 से 35 किग्रा P2O5 और 20 से 25 किग्रा K2O डालना चाहिए। बुवाई के पहले महीने के बाद शीर्ष ड्रेसिंग के रूप में प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किग्रा एन डालना चाहिए।

Irrigation In Mustard Farming:

Irrigation In Mustard Farming

Pre-soaking irrigations should be administered before planting the seeds in mustard farming. After planting the seeds, 3 irrigations should be used at intervals of 4 weeks.

Weed Control/Inter-Culture Operations In Mustard Farming:

Two to three hoeing separated by two weeks should be given. Thinning should be carried out after a two-week interval (in the case of the pure mustard crop). When there is a mix of crops, the mustard crop benefits from the intercropping that is given to the main crop.

भारत में सरसों के बीज के क्षेत्रीय नाम

हिंदी – राय, बनारसी राय, काले सरसों
गुजराती – राय
कन्नड़ – सेव
कश्मीरी – सरिसा, अंक
तेलुगु – अवलु
तमिल – कडुगो
मलयालम – कडुकु
पंजाबी – राय, बनारसी राय, काले सरसों

                       State                              Mustard
Seed Rate kg/haSpacing (cm)
Haryana5.030 x 10-15
Himachal Pradesh 6.030 x 10-15
Madhya Pradesh 5.0-6.045 x 15
Punjab3.5-4.030-45 x 10-15
Rajasthan 4.0-5.030 x 10
Uttar Pradesh 5.0-6.045 x 10

2021-2022 में होगी ज्यादा उत्पादन 

Mustard Oil Cultivation 

सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि इस साल यानी 2021-22 के रबी सीजन में पिछले साल के मुकाबले 25 लाख टन अधिक सरसों का तेल उत्पादन होगा।

आपको बता दें सरसों का रुकवा 81.66 लाख हेक्टर हो गया है जो पिछले साल 65.97 हेक्टर था। इस साल सरसों के उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी जिससे किसानों को भी फायदा मिलेगा और आम जनता को भी सरसों के तेल के दामों में कमी देखने को मिलेगी। 

आपको बता दे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्य में बारिश के कारण सरसों की फसल में मामूली नुकसान देखने को मिले हैं मगर अंदाज़ा लगाया जा रहा है इसके बावजूद किसानों को इस बार सरसों की बंपर पैदावार देखने की उम्मीद है।

किसानों की आय बढ़ेगी 

सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (Central Organization for oil industry and trade) के मुताबिक इस साल रबी सीजन के दौरान देशभर में करीब 110 लाख टन सरसों का उत्पादन होने वाला है, इससे पहले साल 2020-21 में सरसों का उत्पादन 85 लाख टन था।

मिली जानकारी के मुताबिक इस साल राजस्थान सहित सभी राज्य में सरसों की बुवाई ज्यादा हुई है और ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि रबी सीजन के दौरान उत्पादन 100 से लेकर 110 लाख टन तक पहुंच सकता है।

बाबूलाल टाटा का कहना यह है कि किसानों को रबी के पिछले सीजन सरसों की फसल के अच्छे दाम मिले हैं और परिणाम स्वरूप इस सीजन उन्होंने ज्यादा जमीन पर सरसों की बुवाई की है, और मौसम की परिस्थितियों के अनुकूल बनी हुई है, इस साल किसानों की आय भी दुगनी हो सकती है। 

वर्ष 2020-21 में सरसों के भाव 10000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गया था, और ये भी बताया जा रहा है कि सरसों के भाव में इस बार भी तेजी रहने की पूरी उम्मीद है। सरसों के भाव ज्यादा होने से किसानों को भी इसका लाभ मिलता है और इससे किसानों को अच्छा मुनाफा कमाने को मिलता है। 

अगर आप एक किसान है और सरसों के तेल की मील खोलना चाहते हैं तो आपको कुछ उपकरण की जरूरत पड़ेगी

  1. ऑयल एक्सपेलर मशीन
  2. एक मोटर 20 HP की
  3. फ़िल्टर प्रेस मशीन
  4. गैलन 
  5. बॉक्स स्ट्रैपिंग मशीन 
  6. भजन मशीन 
  7. सील मशीन 
नीचे और पढ़ें:

FAQs – Mustard Oil Cultivation

Q 1: Is Indian Mustard Growing Profitable?

A 1: You can make Rs. 1.75 lakh by growing mustard on one hectare. You might expect to make a profit of up to Rs. 1.4 lakh after costs are subtracted.

Q 2: How Much Oil Is Present In A Kilogram Of Mustard?

A 2: To be more precise, 1 kilogram (2 pounds) of a yellow mustard seed can yield 37 lbs (16 kg) of yellow prepared mustard, or just over 5 gallons (19 liters). The dry matter for a generic variety of mustard is about 8%, and it would produce about 16 grams of oil.

Q 3: Which Indian State Produces The Most Mustard?

A 3: The nation’s top producer is the state of Rajasthan. For farmers in states like Rajasthan, Haryana, Madhya Pradesh, and Uttar Pradesh, among others, mustard is a significant cash crop.

Q 4: Will The Cost Of Mustard Oil Drop?

A 4: Dhara mustard oil (1-liter poly pack) is now available at Rs 193 instead of Rs 208 per liter. The price of Dhara refined sunflower oil (1-liter poly pack) has been reduced to Rs 220 from Rs 235 per liter. From Rs 209 to Rs 194, the price of Dhara refined soyabean oil (1-liter poly box) would decrease.

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